कंकालिन मोरे माया /भुवनेश्वर साहू/cgjaslyrics

✦✦ कंकालिन मोरे माया- भुनेश्वर यादव / purana jas geet ✦✦

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गीत - कंकालिन मोरे माया 

गायक - भुनेश्वर यादव 

म्यूजिक कंपनी - भुनेश्वर यादव 

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

ये कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

उड़ान - अरे येहो कंकालिन दाई बड़ा वो चण्डालिन 

बड़ा वो चण्डालिन दाई बड़ा वो चण्डालिन

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

अंतरा -1 

यहो मईया बर बिछिया बिसादे रे भईया लंगूरे -2 

बिसादे रे भईया लंगूरे,बिसादे रे भईया लंगूरे

उड़ान - यहो बिछिया पहिर मै तो नाचव हो ----2 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

 अंतरा -2  

यहो मईया बर पैजन बिसादे रे भईया लंगूरे -2 

बिसादे रे भईया लंगूरे,बिसादे रे भईया लंगूरे

उड़ान - यहो पैजन पहिर मै तो नाचव हो ----2 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

 अंतरा -3   

यहो मईया बर चूड़ी बिसादे रे भईया लंगूरे -2 

बिसादे रे भईया लंगूरे,बिसादे रे भईया लंगूरे

उड़ान - यहो चूड़ी पहिर मै तो नाचव हो ----2 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

 अंतरा -4    

यहो मईया बर करधन बिसादे रे भईया लंगूरे -2 

बिसादे रे भईया लंगूरे,बिसादे रे भईया लंगूरे

उड़ान - यहो करधन पहिर मै तो नाचव हो ----2 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

  अंतरा -5     

यहो मईया बर खिनवा बिसादे रे भईया लंगूरे -2 

बिसादे रे भईया लंगूरे,बिसादे रे भईया लंगूरे

उड़ान - यहो खिनवा पहिर मै तो नाचव हो ----2 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

  अंतरा -6      

यहो मईया बर नथुली बिसादे रे भईया लंगूरे -2 

बिसादे रे भईया लंगूरे,बिसादे रे भईया लंगूरे

उड़ान - यहो नथुली पहिर मै तो नाचव हो ----2 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

अंतरा -7    

यहो मईया बर हरवा बिसादे रे भईया लंगूरे -2 

बिसादे रे भईया लंगूरे,बिसादे रे भईया लंगूरे

उड़ान - यहो हरवा पहिर मै तो नाचव हो ----2 

 कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया

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कंकालिन माता के जस गीत के लिंक नीचे देहावे जाके क्लीक करव 

झूपत आबे ओ नाचत आबे ओ 

देवी के सिंगारे बर 

जब दौड़े कालिका 

चले आये महामाया

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गीत अर्थ

ए गीत म भक्त मन माता कंकालिन दाई ला चण्डालिन रूप म सुमिरत हें। गीत म भक्ति भाव दिखथे जिहां भक्त मन दाई बर गहना बिसाथें – जइसे बिछिया, पैजन, चूड़ी, करधन, नथुली अउ हरवा।

भक्त कहिथे – दाई जब ये सब पहिरही तब हमन नाचबो, गाबो अउ दाई के सेवा करबो।

इहाँ "लंगूरे" शब्द सेवा करे वाला भक्त मन बर आय। वो मन माता ला सजाथें अउ खुशी म नाचथें।

पूरा गीत म दाई के श्रृंगार अउ भक्ति के आनंद दिखथे

🌼 गीत के विशेषता

ए एक पारंपरिक छत्तीसगढ़ी जस गीत आय

माता कंकालिन दाई के श्रृंगार के वर्णन करथे

सेवा जंवारा अउ नवरात्रि म जादा गाये जाथे

बोल आसान अउ नाचे-गाये लायक हवय

हर अंतरा म अलग-अलग गहना के नाम हवय

भक्ति अउ लोकसंस्कृति के सुंदर मिश्रण हव

छत्तीसगढ़ी कहानी

एक गाँव रहिस – जंगल किनारे बसे छोटकन गाँव। ओ गाँव म हर साल नवरात आवतच सबो मन उत्साह म भर जाथें। गाँव के बीचो-बीच म कंकालिन दाई के छोट मंदिर रहिस।

नवरात के पहिली दिन गाँव के बुजुर्ग मन कहिन –

"ए साल दाई के सेवा धूमधाम ले करबो"

गाँव के जवान मन जंवारा बोइन, अउ मइके मन मंदिर सजाइन।

धीरे-धीरे पूरा गाँव म भक्ति के माहौल बनगे।

रात होइस, ढोलक बाजे लगिस, झांझ बजे लगिस। सेवा शुरू होइस।

तब एक बुजुर्ग गायक गाना उठाइस –

"कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया…"

जइसे ही गीत शुरू होइस, सबो भक्त झूम उठिन।

गायक कहिस –

"यहो मईया बर बिछिया बिसादे रे भईया लंगूरे…"

तब गाँव के लइका मन मजाक-मजाक म चांदी के बिछिया लाके दाई के मूर्ति म धर दिन।

सबो मन ताली बजाइन अउ नाचे लगिन।

फेर दुसर अंतरा गाइस –

"यहो मईया बर पैजन बिसादे…"

एक दाई कहिस –

"मोला मोर पैजन दाई ला चढ़ाना हे"

ओ अपन पैजन उतार के माता के चरण म धर दिस।

भक्ति के रंग गाढ़ा होगे।

तीसर अंतरा म चूड़ी के बात आय।

गाँव के बहिनी मन अपन-अपन चूड़ी चढ़ाइन।

अब मंदिर म झंकार गूंजे लगिस।

ऐसे लगत रहिस जइसे दाई खुद नाचत हवय।

फेर गाना म आय –

"यहो मईया बर करधन बिसादे…"

गाँव के एक बूढ़ी अम्मा कहिस –

"मोर दाई खाली नई रहना चाही"

ओ अपन पुराना करधन चढ़ा दिस।

सबो मन भावुक होगिन।

धीरे-धीरे हर अंतरा म गहना चढ़त गीस –

खिनवा, नथुली, हरवा…

मूर्ति पूरा सजगे।

दाई के रूप देख के सबो मन चौंक गिन।

तभी ढोलक जोर ले बजे लगिस।

एक लइका झूम के नाचना शुरू करिस।

फेर दूसर, तइसर…

देखत-देखत पूरा गाँव नाचे लगिस।

ऐसा लगत रहिस जइसे दाई खुद सबके संग नाचत हवय।

एक बुजुर्ग कहिस –

"देखव, जब मन ले सेवा करथन, दाई खुश हो जाथे"

रात भर सेवा चलिस।

भोर होइस, आरती होइस।

सबो मन एक बात समझ गिन –

दाई ला सोना-चांदी नई, मन के भक्ति चाही।

गहना त बस प्रतीक हवय, असली श्रृंगार भक्त के प्रेम आय।

ओ दिन ले हर साल ए गीत जरूर गाये जाथे।

गाँव के परंपरा बनगे –

पहिली सेवा म "कंकालिन मोरे माया" गाये जाथे।

जब-जब ए गीत गूंजथे,

गाँव म भक्ति, खुशी अउ नाचा के माहौल बन जाथे।

आज घलो लोग कहिथें –

जिहां ए गीत गूंजथे,

ओतका कंकालिन दाई के कृपा जरूर बरसथे।

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